भावीपीढ़ी को शिल्प ज्ञान देने के साथ-साथ शिक्षा का महत्व भी समझाएं

कोण्डागांव जिले के शिल्पियों से रुबरु हुई राज्यपाल
रायपुर, 04 दिसम्बर 2018 राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल से कोण्डागांव जिले के प्रवास के दौरान स्थानीय नवीन विश्रामगृह के परिसर में शिल्पकारों के प्रतिनिधिमण्डल ने मुलाकात की। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि शिल्पकार अपनी परंपरागत व्यवसाय अपनाएं और अगली पीढ़ी को भी इसका ज्ञान दें। इसके साथ ही वे शिक्षा के महत्व को समझें और पुत्र और पुत्री दोनों को समान रूप से शिक्षित करें। उन्हें आधुनिक और तकनीकी शिक्षा लेने के लिए प्रेरित करें।

उन्होंने कहा कि बेलमेटल कला एक उत्कृष्ट किस्म की कारीगरी है, जिसका देश ही नहीं विदेशों में भी एक विशिष्ट स्थान है। शिल्पकारों द्वारा उच्च तापमान में जिस प्रकार इसका निर्माण किया जाता है वह कठिनतम कार्य है। जिसमें निरंतर साधना और समर्पण की आवश्यकता होती है। यह सराहनीय होने के साथ-साथ प्रेरणादायी भी है।

इस अवसर पर शिल्पकारों ने भी अपनी विभिन्न समस्याओं को राज्यपाल के समक्ष रखा। इस पर राज्यपाल महोदया द्वारा उचित समाधान का आश्वासन दिया गया।

इस कार्यक्रम में बस्तर संभाग के कमिश्नर श्री धनंजय देवांगन, पुलिस महानिरीक्षक श्री विवेकानंद सिन्हा, जिला कलेक्टर श्री नीलकंठ टेकाम, पुलिस अधीक्षक श्री अरविन्द कुजूर सहित जिले के शिल्पकार उपस्थित थे।

‘कबाड़ से जुगाड़’ पर आधारित विज्ञान प्रदर्शनी का किया अवलोकन
राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने आज बस्तर प्रवास के दौरान कोण्डागांव के भेलवापदर वार्ड स्थित प्राथमिक शाला के परिसर में आयोजित विज्ञान प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी में छात्र-छात्राओं द्वारा निर्मित घरेलू एवं अनुपयोगी सामग्री से बने विभिन्न उपकरणों के मॉडल की राज्यपाल ने सराहना की। इस विज्ञान प्रदर्शनी में छात्रों द्वारा कृषि यंत्र पर्यावरण उपकरण, सोलर कुकर, मटका फ्रिज, सूक्ष्मदर्शी यंत्र, घरेलू वैक्यूम क्लीनर के मॉडल तैयार किए गए थे। अवलोकन के दौरान राज्यपाल ने इन सामग्रियों की उपयोगिता के बारे में बच्चों से प्रश्न पूछे और सही उत्तर बताने पर शाबासी दी।
राज्यपाल को जिला कलेक्टर श्री नीलकंठ टेकाम ने बताया कि जिले की शालाओं में छात्रों की प्रतिभा को तराशने के लिए अनुपयोगी सामानों से विभिन्न सामग्रियाँ एवं कलाकृतियां तैयार करने के लिए उन्हें विशेष रुप से प्रोत्साहित किया जाता है और अन्य अवसरों पर इनकी प्रदर्शनियां भी लगाई जाती है जिससे की उनकी कल्पनाशीलता को बढ़ावा मिल सके और इस प्रदर्शनी को ‘‘कबाड़ से जुगाड़‘‘ की संज्ञा दी गई है। इसके साथ ही राज्यपाल के समक्ष पहली और दूसरी के नन्हें बच्चों ने प्रार्थना एवं वंदे मातरम गीत प्रस्तुत किया। राज्यपाल ने सभी बच्चों को चाकलेट वितरित की। राज्यपाल ने स्कूल में निरीक्षण के दौरान बच्चों में दंत रोग की समस्या की ओर जिला कलेक्टर का ध्यान आकर्षित किया। इस पर कलेक्टर द्वारा जिला अस्पताल के दंत चिकित्सकों की टीम को बच्चों के परीक्षण के निर्देश दिए गए।
इस अवसर पर बस्तर संभाग के कमिश्नर श्री धनंजय देवांगन, पुलिस महानिरीक्षक श्री विवेकानंद सिन्हा, पुलिस अधीक्षक श्री अरविन्द कुजूर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल आज कोंडागांव जिले में स्थित भेलवापदर में आयोजित शिल्प मेला में शामिल हुई। उन्होंने मेले में शिल्पकारों द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टालों में बेलमेटल सहित अन्य कला-कृतियों का अवलोकन किया। राज्यपाल ने वहां स्थित बेलमेटल शिल्प कार्यशाला में जाकर शिल्प के प्राथमिक स्तर से लेकर पूर्ण हो जाने तक की सभी प्रक्रिया को देखा। उन्होंने कहा – यह उत्कृष्ट कारीगरी का बेजोड़ नमूना है। शिल्पशास्त्र में पीएचडीधारी भी ऐसा उत्कृष्ट डिजाईन नहीं उकेर सकते।
शिल्प कार्यशाला में उपस्थित शिल्पकार मंशाराम बघेल ने शिल्प निर्माण की कच्ची सामग्री, विभिन्न कलाकृतियों के सांचो एवं गर्म भट्टी में तपाने की प्रक्रिया को राज्यपाल के समक्ष प्रदर्शन करके दिखाया। राज्यपाल को शिल्पकारों ने बेलमेटल एवं टेराकोटा से निर्मित अलंकृत नंदीबैल, हाथी, सल्फीपेड़, वनवासी दंपति, सुसज्जित, दौड़ते हिरण जैसी प्रख्यात कलाकृतियों के अलावा पौराणिक आख्यान संबंधित निर्मित कलाकृतियों के संबंध में भी जानकारी दी। राज्यपाल ने मृत्तिका (माटी) शिल्प एवं लौह शिल्प की कार्यशाला में कारीगरों की सराहना की। शिल्पकारों ने राज्यपाल को स्मृति चिन्ह के रुप में कलाकृतियाँ भेट की।
इस अवसर पर बस्तर संभाग के कमिश्नर धनंजय देवांगन, पुलिस महानिरीक्षक विवेकानंद सिन्हा, जिला कलेक्टर नीलकंठ टेकाम, पुलिस अधीक्षक अरविन्द कुजूर उपस्थित थे।

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