राजभवन के सभागार में महात्मा गांधी के विचार एवं दर्शन विषय पर संगोष्ठी का आयोजन

गांधी दर्शन वृहत एवं अनुकरणीय: श्री जायसवाल : राजभवन में महात्मा गांधी के विचार एवं दर्शन पर संगोष्ठी का आयोजन
रायपुर, 02 अक्टूबर 2018 राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर आज राजभवन के सभागार में महात्मा गांधी के विचार एवं दर्शन विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग और कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के प्राध्यापकगण और छात्र-छात्राएं शामिल हुए।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए राजभवन एवं उच्च शिक्षा विभाग के सचिव श्री सुरेन्द्र कुमार जायसवाल ने गांधी दर्शन को वृहत एवं अनुकरणीय बताया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के विचार इतने वृहत है कि उन्हें गांधी वॉगमय के सौ खण्डों में प्रकाशित किया जा सका और प्रत्येक खण्ड में पांच सौ से छः सौ पेज हैं। गांधी दर्शन को अनुकरणीय बताते हुए कहा कि उनके एक-एक विचार पर एक सम्पूर्ण मंत्रालय का गठन किया जा सकता है। इसके लिए उन्होंने ग्रामोद्योग और सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान का उदाहरण दिया। राजभवन में इस प्रकार की संगोष्ठी आयोजन को एक अभिनव प्रयोग बताते हुए उन्होंने इसका प्रेरणास्रोत राज्यपाल छत्तीसगढ़ राज्य श्रीमती आनंदीबेन पटेल को बताया। श्री जायसवाल ने बताया कि राज्यपाल के निर्देशों पर ही राजभवन में आम जनता के प्रदर्शनी अवलोकन के लिए 03 दिन ओपन हाउस रखा गया है।

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रबंध संचालक ग्रामोद्योग श्री आलोक अवस्थी ने कहा कि महात्मा गांधी ने खादी वस्त्र निर्माण के माध्यम से राष्ट्रीयता की भावना विकसित की। उन्होंने खादी को स्वतंत्रता आंदोलन का हथियार बनाया। श्री अवस्थी ने उपस्थित प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों से ग्रामोद्योग को बढ़ावा देने की अपील की।
इस अवसर पर संगोष्ठी को संबोधित करते हुए पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति श्री केसरीलाल वर्मा ने कहा कि पूरे विश्व को महात्मा बुद्ध के बाद किसी भारतीय ने प्रभावित किया तो वे महात्मा गांधी ही थे। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में बैरिस्टर गांधी के रूप में जो संघर्ष प्रारंभ किया, अपनेे आचार-विचार के आधार पर वे महात्मा गांधी बने। प्रो. वर्मा ने कहा कि महात्मा गांधी समाज से द्वेष-घृणा को मिटाने के पक्षधर थे।

संगोष्ठी को हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग के कुलपति प्रो. शैलेन्द्र सराफ ने संबोधित करते हुए कहा कि कोई व्यक्तित्व एवं कृतित्व किस प्रकार एक संस्था के रूप में परिवर्तित होती है, महात्मा गांधी इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी मैकालियन शिक्षा पद्धति का विरोध करते हुए शिक्षा को कौशल आधारित बनाना चाहते थे। उन्होंने गांधीवादी विचारधारा को समसामयिक परिस्थितियों के अनुरूप विचार कर उन्हें अपनाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ हिन्दी ग्रंथ अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा ने कहा कि महात्मा गांधी द्वारा अपने विचारों को अपनी व्यक्तिगत जिंदगी में अमल में लाया जाना ही उन्हें अलग बनाता है। महात्मा गांधी को बहुआयामी व्यक्तित्व का स्वामी बताते हुए श्री शर्मा कहा कि वे आधुनिक काल के अंतिम और उत्तर आधुनिक काल के प्रथम विचारक थे। श्री शर्मा ने महात्मा गांधी के आर्थिक विचारों का जिक्र करते हुए कहा कि गांधी जी ने भौतिकतावादी संस्कृति में अगले सौ वर्षों की परिस्थिति की कल्पना की थी और रास्ते सुझाए थे। श्री शर्मा ने कहा कि भारत में वर्ष 1991 के आर्थिक उदारवाद से उत्पन्न परिस्थितियों में महात्मा गांधी के विचार और सुझाये रास्ते और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
संगोष्ठी को विद्यार्थियों की ओर से श्री अंकित सोनवानी, श्री आदित्य त्रिपाठी, श्री मेहुल शर्मा, सुश्री दीपिका धुरंधर, श्री भूपेश त्रिपाठी, कु. अंजु प्रधान, सुश्री प्रियंका डायरे, श्री तेज साहू ने भी महात्मा गांधी के विचारों और दर्शन पर अपने विचार रखे।
इस अवसर पर राजभवन के विधिक सलाहकार श्री एन. के. चन्द्रवंशी, उप सचिव श्रीमती रोक्तिमा यादव, नियंत्रक श्री एस.के. अग्रवाल, विश्वविद्यालयों के प्राध्यापकगण और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

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